BUDDHA

SCIENCE OF MEDITATION

ऐसा मुझे दिखायी पड़ता है कि परम जीवन या परमात्मा या आत्मा या सत्य को पाने के लिए दो बातें जरूरी हैं। एक बात तो जरूरी है, जो परिधि की जरूरत है। समझें, साधना की परिधि। और एक बात जरूरी है, जिसको हम कहेंगे साधना का केंद्र। साधना की परिधि और साधना का केंद्र। या साधना का शरीर और साधना की आत्मा। साधना की परिधि पर आज मैं चर्चा करूंगा; और कल साधना की आत्मा पर या साधना के केंद्र पर; और परसों साधना के परिणाम पर। ये तीन ही बातें हैं--साधना की परिधि, साधना का केंद्र और साधना का परिणाम। या यूं कह सकते हैं कि साधना की भूमिका, साधना और साधना की सिद्धि।

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OSHO

BODY AND MIND

शरीर-शुद्धि के क्या अर्थ हैं? शरीर-शुद्धि का पहला तो अर्थ है, शरीर के भीतर, शरीर के संस्थान में, शरीर के यंत्र में कोई भी रुकावट, कोई भी ग्रंथि, कोई भी कांप्लेक्स न हो, तब शरीर शुद्ध होता है।

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RAMANA MAHARISHI

WHO AM I ?

गुरु मिले अगम के बासी।।
उनके चरणकमल चित दीजै सतगुरु मिले अविनासी।
उनकी सीत प्रसादी लीजै छुटि जाए चौरासी।।
अमृत बूंद झरै घट भीतर साध संत जन लासी।
धरमदास बिनवे कर जोरी सार सबद मन बासी।।

वो नामरस ऐसा है भाई।।
आगे-आगे दहि चले पाछे हरियल होए।
बलिहारी वा बृच्छ की जड़ काटे फल होए।।
अति कड़वा खट्टा घना रे वाको रस है भाई।
साधत-साधत साध गए हैं अमली होए सो खाई।।
नाम रस जो जन पीए धड़ पर सीस न होई।
सूंघत के बौरा भए हो पियत के मरि जाई।।
संत जवारिस सो जन पावै जाको ज्ञान परगासा।
धरमदास पी छकित भए हैं और पीए कोई दासा।।
खरोखश तो उठे रास्ता तो चले
मैं अगर थक गया काफिला तो चले
चांद सूरज बुजुर्गों के नक्शे कदम
खैर बुझने दो इनको, हवा तो चले
हाकिमे शहर, यह भी कोई शहर है
मस्जिदें बंद हैं, मयकदा तो चले
बेलचे लाओ, खोलो जमीं की तहें
मैं कहां दफ्न हूं, कुछ पता तो चले
आदमी के जीवन की समस्या एक, समाधान भी एक। आदमी के जीवन में बहुत समस्याएं नहीं हैं और न बहुत समाधानों की जरूरत है। एक ही समस्या है कि मैं कौन हूं? और एक ही समाधान है कि इसका उत्तर मिल जाए। 

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